थोड़ी सी उम्र बाकी है

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कवि अपनी प्रेमिका के इंतज़ार में अपना जीवन यूँ हीं व्यर्थ कर रहा है। वक़्त उसके लिए उसी मोड़ पर रुक गया जहाँ दोनों एक दुसरे से अलग हुए थे। इस हिंदी कविता “थोड़ी सी उम्र बाकी है” में वो अपने मन की व्यथा सुना रहा है।

बरसता आसमान

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आज आसमान खुल कर बरस रहा है। मुंबई के महलों और झोपड़ों में कोई भेदभाव नहीं करता। ज़रूरी हो कर भी आसमान का ये बरसता पानी छत की तलाश में भटकती माँ के लिए मुसीबत बन जाता है।

झुमकी (तीसरा अध्याय)

Cover image for chapter 3 of hindi story jhumki

जब सब कुछ स्थिर हो तो मन में उथल पुथल मची रहती है। इंसान न अपनी आवाज़ सुन पाता है, न हीं वो अपने खुद के भाव समझ पाता है। कुछ गलत न हो कर भी बुधिया और झुमकी के बीच कुछ सही न था। ये उनके शादीशुदा जीवन का वो दौर था जब आलिंगन भी चुभने लगता है। न प्यार है, न बैर है़।

तेरा रूप

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इस कविता में कवि अपनी प्रेमिका के रूप का गुणगान कर रहा है। रूप वो नहीं जो उम्र के साथ ढल जाये। जो कभी मद्धम न पड़े, जिसकी कभी शाम न हो। कवि अपनी प्रेमिका के व्यावहारिक गुणों हुए और उसके नारीत्व का बखान कर रहा है।

मुलाकात

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इस कविता में कवि अपनी प्रेमिका से अपने निःस्वार्थ प्रेम का एहसास बयान कर रहा है। वो बताना चाहता है की कैसे उसका होना हीं कवि के जीवन को सार्थक बनता है।

आम का द्वन्द

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आम इंसान अपनी रोज़ी रोटी और घर परिवार में उलझा रह जाता है। देश और समाज के प्रति उसकी ज़िम्मेदारियों का एहसास स्वतः हीं दब दब कर अपनी पहचान खो देता है। लेकिन वक़्त और हालातों की पुकार उस एहसास को जगाने की निरंतर कोशिश करते हैं। ये कविता अपनी सांसारिक बेहोशी से जागे एक आम इंसान के द्वन्द की ललकार है।

किसका कसूर?

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गरीबी और मुफलिसी किसका कसूर है ? गरीब का? या फिर गरीबों की बस्ती को महलों की ऊँचाइयों से अनदेखा करने वाली नज़रों का। अपना घर बसाने में हम कहीं किसी गरीब की आह के ज़िम्मेदार तो नहीं बन बैठे ?

गोल दुनिया

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दिन भर की भूख के बाद, जब मज़दूरी कर लौटी माँ रात को उसे रोटी देती है, उसकी दुनिया जैसे उस रोटी में सिमट जाती है। उसकी दुनिया उस गोल रोटी की भाँति गोल है।

५ रुपये का सिक्का

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किसी भी चीज़ की कीमत उसे इस्तेमाल करने वाले की ज़रुरत पर निर्भर करती है। जो ५ रुपये का सिक्का किसी के लिए चिल्लड़ कहलाता है, वही सिक्का किसी और के लिए अनमोल हो सकता है।

झुमकी (दूसरा अध्याय)

झुमकी को वही खूबसूरती देखनी थी जो आईना कल दिखा रहा था। उसने बालों को सँवारा। चेहरे पे 70 रुपये की मेहंगी वाली क्रीम का लेप लगाया। भड़कदार लाल रंग की लिपस्टिक भी लगायी। लेकिन आईना टस से मस न हुआ। पढ़िए “झुमकी” का ये दूसरा अध्याय।