किसका कसूर?

hindi kavita kiska kasoor

गरीबी और मुफलिसी किसका कसूर है ? गरीब का? या फिर गरीबों की बस्ती को महलों की ऊँचाइयों से अनदेखा करने वाली नज़रों का। अपना घर बसाने में हम कहीं किसी गरीब की आह के ज़िम्मेदार तो नहीं बन बैठे ?

गोल दुनिया

Photo by namo deet on Pexels.com

दिन भर की भूख के बाद, जब मज़दूरी कर लौटी माँ रात को उसे रोटी देती है, उसकी दुनिया जैसे उस रोटी में सिमट जाती है। उसकी दुनिया उस गोल रोटी की भाँति गोल है।

५ रुपये का सिक्का

Photo by Arvind shakya on Pexels.com

किसी भी चीज़ की कीमत उसे इस्तेमाल करने वाले की ज़रुरत पर निर्भर करती है। जो ५ रुपये का सिक्का किसी के लिए चिल्लड़ कहलाता है, वही सिक्का किसी और के लिए अनमोल हो सकता है।

तेरे जाने की वजह

Hindi-poem-jaane-ki-wajah

“तेरे जाने की वजह” एक प्रेमी की कुछ पंक्तियों का संग्रह है। अपनी प्रेमिका से अलग होने के बाद, प्रेमी अब भी उसके इंतज़ार में है।

तन्हाई

हिंदी कविता तन्हाई

ये हिंदी कविता तन्हाई, कवि का अपनी प्रेमिका से बिछड़ जाने के एहसास का वर्णन है। “याद है वो तुमसे टकरा जाना, फिर गिरना तुम्हारे हाँथो से उन किताबों का। वो पह्ली बार मिले थे हम तुम, फिर चला था सिलसिला कई मुलाकातों का।

जात

Photo by Ric Rodrigues on Pexels.com

मैं ढून्ढ लूँगा अपना रब इंसानों में कहीं,
पत्थरों से मैं यूँ भी बात करता नहीं। इतना है खून बहा, इतनी है लाशें देखी । तलवारों से, हत्यारों से, अब मैं डरता नहीं।

समर्पण

तेरे अरमानों का कत्ल करता रहा,
तेरे समर्पण से खुद को मर्द माना। मर्दानगी का खोखला एहसास।

बेघर

Photo by Pixabay on Pexels.com

इनका कोई पक्का ठिकाना नहीं होता है। महानगरों में मेहनत मज़दूरी कर अपने परिवार का पोषण करने वाले ये मेहनतकश हर रोज़ बेघर होते हैं।