किसका कसूर?

Hindi Kavita kiska kasoor
hindi kavita kiska kasoor

ऊँचे मकानों में बैठ
ना जाने क्यों
यूँ गुरूर होता है?

ऊँच नीच के
ये कैसे फासले ।
क्यों एक इंसान
दूसरे का हुज़ूर होता है?

तु झुकता है
माना
अपनी गरीबी से
तु मजबूर होता है।

अपने अहम के वास्ते
तुझे झुकने देना
ये भी तो
कसूर होता है।

By नितेश मोहन वर्मा

भूल न जाए ये ज़माना। ऐ मौत तेरे आने से पहले, कुछ लफ्ज़ छोड़ जाऊँ किताबों में मैं। Exploring life, with some humor. Indian | Poet #HindiPoetry #शायरी #Poetry

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