तुझसे मुलाकात भी अच्छी है
तेरी हर बात भी अच्छी है।
तेरी यादों में जो गुज़रे
वो हर इक रात भी अच्छी है।

कब आयी, तू क्यों आयी
ज़िन्दगी में मेरी।
न पूछा मैंने
न सोचा मैंने।
कैसे हुई हिस्सा मेरा
हर गम में
तू हर ख़ुशी में मेरी।
न पूछा मैंने
न सोचा मैंने।

तेरे बिन अब मैं कुछ भी नहीं
तू है
तो मेरी औकात भी अच्छी है।
तेरी यादों में जो गुज़रे
वो हर इक रात भी अच्छी है।

दोस्त कह लो
तुम प्यार कह लो।
नहीं ज़रुरत किसी नाम की मुझे।
आज तू संग है
कल जाने कहाँ?
नहीं फिक्र किसी अंजाम की मुझे।

जीत जाऊँ
तो गम क्या है ?
तुझसे मिले
तो हार की सौगात भी अच्छी है।
तेरी यादों में जो गुज़रे
वो हर इक रात भी अच्छी है।

By नितेश मोहन वर्मा

भूल न जाए ये ज़माना। ऐ मौत तेरे आने से पहले, कुछ लफ्ज़ छोड़ जाऊँ किताबों में मैं। Exploring life, with some humor. Indian | Poet #HindiPoetry #शायरी #Poetry

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