मेरी जेब में
वो सोया सा था ।
२, ५, १० की भीड़ में
खोया सा था ।

सिग्नल पे रुक
अभिमान से झुक ।
नन्हे से हाथ पर
मैंने जब रखा उसे ।

वो सोया 5 का सिक्का
झट से जाग गया।
आंखों से शुक्रिया बोल
वो नन्हा बच्चा भाग गया ।

आज वो सिक्का
किसी के काम आएगा ।
थोड़ा ही सही
नन्हा, भूखा पेट
कुछ आराम पाएगा।

By नितेश मोहन वर्मा

भूल न जाए ये ज़माना। ऐ मौत तेरे आने से पहले, कुछ लफ्ज़ छोड़ जाऊँ किताबों में मैं। Exploring life, with some humor. Indian | Poet #HindiPoetry #शायरी #Poetry

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