तु सहती रही
पर हँसती रही।

वो सहमी चुप्पी
मैंने कभी न तेरा दर्द जाना।

तेरे अरमानों का कत्ल करता रहा
तेरे समर्पण से खुद को मर्द माना।

woman crying. hindi poem on domestic violence.
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आँखों में सवाल, होंठों पे कंपन क्युँ है?
कर सकती हो इन्कार।
गर मन में है विरोध
तो तन का ये समर्पण क्युँ है?

By नितेश मोहन वर्मा

भूल न जाए ये ज़माना। ऐ मौत तेरे आने से पहले, कुछ लफ्ज़ छोड़ जाऊँ किताबों में मैं। Exploring life, with some humor. Indian | Poet #HindiPoetry #शायरी #Poetry

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