हैप्पी बर्थडे सुधा

writing letters to the dead wife
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हैप्पी बर्थडे सुधा

तुम मानोगी नहीं लेकिन आज गज़ब की स्फुर्ती है शरीर में। घुटना बोल रहा है जगजीवन बाबु जाईये दौड़ आईये। आखिर हमारी सुधा का बर्थडे है। यहीं तो है मेरा वेलेंटाइन। याद है तुम कैसे शर्मा जाती थी। मेघा देख लेगी, मेघा सुन लेगी। यहीं रट लगा रखती थी। बाप हो गया तो क्या बीवी से प्यार करना छोड़ दूँ?

सुनो, आज नाश्ता बाहर करूँगा। बाद में मत बोलना। छोले भटूरे और लस्सी। वाह!

कोई तो इशारा करो सुधा। तुम्हारा रोमांस अभी भी मीना कुमारी के ज़माने का है।

एक बात बोलूँ। अब तुम बातों में मुझे हरा नहीं सकती। मैं जो भी बोलूँ तुम्हें सुनना होगा। बताओ कैसा लग रहा है? अब मेरी हर बात सही। वैसे जब तुम चिढ़ कर मेरी बात बीच में काट रेल की रफ्तार में बोलती थी, जी करता था झट से गले लगा लूँ। यहीं मात खा गयी हमारी पीढ़ी। तुम्हें प्यार से गले लगाने के ऐसे कितने मौके मैंने यूँ ही जाने दिये।

वैसे मैंने पहली चिट्ठी तुम्हारी चूड़ियों के डिब्बे के नीचे दबा कर रख दी थी। हर दोपहर जाने क्या करती थी तुम। नीली निकाल कर हरी पहन लेना। हरी न जमे तो लाल। लगी रह्ती थी चूड़ियों के साथ। सारी चूड़ियाँ वैसी हीं रखी है। मैंने सोचा क्या पता शायद चूड़ियों का मोह तुम्हें खींच लाये कभी। सो मैंने चिट्ठी वही रख दी। पढ़ लेना सुधा।

इंटरनेट के तेज़ ज़माने में इस बूढ़े जगजीवन के पास ये एक हीं तरीका है तुम से बात करने का। हैप्पी बर्थडे मेरी सुधा।

हमेशा तुम्हारा

जगजीवन

By नितेश मोहन वर्मा

भूल न जाए ये ज़माना। ऐ मौत तेरे आने से पहले, कुछ लफ्ज़ छोड़ जाऊँ किताबों में मैं। Exploring life, with some humor. Indian | Poet #HindiPoetry #शायरी #Poetry

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