झुमकी (पाँचवाँ अध्याय)

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रिश्ते कुछ कुछ पौधों की तरह होते हैं । प्यार की धूप, अपनेपन की बूँदें और खट्टी-मीठी बातों की खाद से रिश्ते फलते फूलते हैं । ये सब न हो, तो पौधों के जैसे धीरे धीरे मुर्झा जाते हैं । बस इक टीस रह जाती है । लेकिन एक बात है । मुर्झाये रिश्तों में फिर से जान आ सकती है । सवाल ये है की पहल कौन करे?

थोड़ी सी उम्र बाकी है

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कवि अपनी प्रेमिका के इंतज़ार में अपना जीवन यूँ हीं व्यर्थ कर रहा है। वक़्त उसके लिए उसी मोड़ पर रुक गया जहाँ दोनों एक दुसरे से अलग हुए थे। इस हिंदी कविता “थोड़ी सी उम्र बाकी है” में वो अपने मन की व्यथा सुना रहा है।

तेरा रूप

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इस कविता में कवि अपनी प्रेमिका के रूप का गुणगान कर रहा है। रूप वो नहीं जो उम्र के साथ ढल जाये। जो कभी मद्धम न पड़े, जिसकी कभी शाम न हो। कवि अपनी प्रेमिका के व्यावहारिक गुणों हुए और उसके नारीत्व का बखान कर रहा है।

मुलाकात

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इस कविता में कवि अपनी प्रेमिका से अपने निःस्वार्थ प्रेम का एहसास बयान कर रहा है। वो बताना चाहता है की कैसे उसका होना हीं कवि के जीवन को सार्थक बनता है।

तेरे जाने की वजह

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“तेरे जाने की वजह” एक प्रेमी की कुछ पंक्तियों का संग्रह है। अपनी प्रेमिका से अलग होने के बाद, प्रेमी अब भी उसके इंतज़ार में है।

तन्हाई

हिंदी कविता तन्हाई

ये हिंदी कविता तन्हाई, कवि का अपनी प्रेमिका से बिछड़ जाने के एहसास का वर्णन है। “याद है वो तुमसे टकरा जाना, फिर गिरना तुम्हारे हाँथो से उन किताबों का। वो पह्ली बार मिले थे हम तुम, फिर चला था सिलसिला कई मुलाकातों का।